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मेरे अल्फाज़

आगे यदि ऊंचाई होगी

Jatinder Sharda

90 कविताएं

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आगे यदि ऊंचाई होगी
पीछे गहरी खाई होगी
कहीं गूंजता होगा क्रंदन
कहीं बजती शहनाई होगी
शेरों की संसद बैठेगी
भेड़ों की सुनवाई होगी
कभी अकेला नहीं चलूंगा
संग मेरे परछाई होगी
सपना कोई देख न पाया
शायद नींद न आई होगी
खुला खुला लगता है आंगन
उठी दीवार गिराई होगी



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