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मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल

Jatinder Sharda

267 कविताएं

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यादों की डायरी में रखा गुलाब हूं।
बेहिसाब यादों का मैं हिसाब हूं।
होने या न होने का कैसे यकीन हो
मैं ख़्वाब हूं किसी का या इक सराब हूं।
आंधियों के बीच हूं जलता हुआ दीया
कांटों के बीच खिलता हुआ इक गुलाब हूं।
जिंदगी की रात का तू माहताब है
जिंदगी के दिवस का मैं आफताब हूं।
हदों में बांधना कभी मुमकिन नहीं मुझे
जंज़ीरें तोड़ते हुआ मैं इंकलाब हूं।
Jatinder sharda (ग़ज़ल का सफ़र )


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