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मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल़

Jatinder Sharda

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मिल गई यह जिंदगी आयास में।
देव गण पाते नहीं प्रयास में।
समय की धारा है,यह पहिया नहीं,
भावी को मत ढूंढिए इतिहास में।
खो गए हम ऐसी उहापोह में,
जिंदगी बीती विरोधाभास में।
चौहद वर्षों बाद सीता मिल गई,
खो गई सीता अयोध्या वास में।
वस्तुतः इतना तो जीवन लाभ है,
मधुर पल बीते जो काव्य विलास में।
Jatinder sharda (ग़ज़ल का सफ़र )



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