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मेरे अल्फाज़

आप मेरे गम सीने में क्या छुपा पाओगे

Jatinder Malot

106 कविताएं

104 Views
आप मेरे गम सीने में क्या छुपा पाओगे
गर जीना पड़ा मेरी तरह घडी़ भर में मर जाओगे

वताता नहीं अपनी जिन्दगी की हकीकत
सुनकर एक वार मेरे साए से भी डर जाओगे

शाम हुई जा रहें हैं सभी अपनी-अपनी मजिंलों को
मुझे रुक कर कोई नहीं पुछता, तुम किधर जाओगे

मत जाना हमें ठुकराकर तुम
भरना तिनकों की तरह विखर जाओगे

रुक कर चौराहे प दिल पूछता है
एकांत तुम किधर जाओगे

सुवह हो गई है हमें मरे हुए
नदीम मिलने हमसे कव आओगे।

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