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मेरे अल्फाज़

जमाना बीत गया

Jaiprakash srivastava

2 कविताएं

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जमाना बीत गया हम तो दीद को तरस गएआपके
चुनाव ने फिर आपको मेरे दर पर ला दिया
प्यार में यूं वादा फरोशी से टूटजातेहै दिल
आपने तो वादा फरोशी का मतलब ही बदल दिया
भूख प्यास और बेकारी ग़रीबी सब नारेहै मुफीद
आपने सालों साल हमें नारों में बदल दिया
हम इन्सान न रह गए पर वोटर बने रहे
आपने यूं इन्सानियत का चेहरा बदल दिया
जो नूर चेहरे पर आता जा रहा है आपके
देखते ही देखते यूं आपका चेहरा ही बदल गया
बेमुरव्वत होआपने तोड़ डाला दिल अवाम के
फिर ख़ामोश जम्हूरियत को शोर में बदल दिया
हम इन्सान थे औजार बन कर रह गए
शक्ल इन्सान की खुदगर्जी से आपने बदल दिया ।

जयप्रकाश श्रीवास्तव ,
115AUGF, santnagar east of kailash near Post office new Delhi 110065



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