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EK BAT KAHU TUM SUN BHI LO

मेरे अल्फाज़

एक बात कहूं तुम सुन भी लो

jai prakash

6 कविताएं

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एक बात कहु तुम सुन भी लो,
मुझमे खोकर कुछ बुन भी लो।

यूं बैठो ना खामोश यहां,
कुछ बात नयी तुम कह भी लो।

कुछ पल का ये है साथ हमारा,
पर चाहत देखो कम ना हो।

एक बात कहूं तुम सुन भी लो
कितनी रातें बीत गयी हैं ,
कितनी यादें और अभी हैं।

पल-पल तुम हो सांसों जैसी,
और सांसें देखो कम ना हों
एक बात कहूं तुम सुन भी लो
हम तुम मिल एक ख्वाब बुनेंगे,
अपनों के संग प्यार बुनेंगे।

दूँगा इतना प्यार तुम्हें मैं,
खुशियों का संसार तुम्हें मैं,
संग मेरे तुम रह भी लो,
एक बात कहूं तुम सुन भी लो।

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