आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Jai hind
Jai hind

मेरे अल्फाज़

जय हिन्द

अमर संदीप

8 कविताएं

53 Views
कोई हस्ती कोई मस्ती 
कोई चाहत पे मरता है

कोई नफरत कोई शोहरत
कोई फ़ितरत पे मरता है

हम तो शामिल है उन दीवानों में,
जो पल पल भारत पे मरता है

तुझपे क़ुर्बान सब कुछ ऐ वतन तू मेरी शान है
मेरी रूह के ज़र्रे-ज़र्रे में बसता हिंदुस्तान है

- अमर संदीप

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Your Story has been saved!