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Jai hind

मेरे अल्फाज़

जय हिन्द

अमर संदीप

10 कविताएं

59 Views
कोई हस्ती कोई मस्ती 
कोई चाहत पे मरता है

कोई नफरत कोई शोहरत
कोई फ़ितरत पे मरता है

हम तो शामिल है उन दीवानों में,
जो पल पल भारत पे मरता है

तुझपे क़ुर्बान सब कुछ ऐ वतन तू मेरी शान है
मेरी रूह के ज़र्रे-ज़र्रे में बसता हिंदुस्तान है

- अमर संदीप

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