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मेरे अल्फाज़

कमाता कोई खाता कोई

Jagdish Prasad

8 कविताएं

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जीवन में ऐसा भी होता है कई बार
कमाता है जो खाता नहीं है वो हर बार
अपनी सुंदर सी पत्नी के नाम
470 करोड़ की संपत्ति छोड़ कर
पति गए स्वर्ग सिधार
बाद जाने के पति के
ड्राइवर संग रचा विवाह
पत्नी ने अपना जीवन लिया सुधार
पर यह क्या, मात्र दो वर्ष
और सुख भोग पत्नी भी
इहलोक से कर गई प्रस्थान
संयोगवश तब तक उनके
नहीं हुई थी कोई संतान
ड्राइवर जो कोसता रहा दिन रात
मालिक बड़ा कंजूस है
मेहनत कर कर मैं मरा
मेरा कोई नहीं गुणगान
लेकिन अब जाने पर दोनों के
ड्राइवर सोच रहा, लगा ध्यान
जिस मालिक को कोसता रहा हर बार
वह तो कमाता रहा लगातार
देने को अपने ड्राइवर को
हर पल हर सुख इस संसार
सारी सम्पत्ति का मालिक बन
ड्राइवर अब कहता यही बारम्बार
जीवन में ऐसा भी होता है कई बार
कमाता है जो खाता नहीं है वो हर बार

- जगदीश प्रसाद शर्मा

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