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मेरे अल्फाज़

तुमनें लुटाई मुझ पर उस चाहत का शुक्रिया

Iqbal mehdi

121 कविताएं

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तुमनें लुटाई मुझपे उस चाहत का शुक्रिया।।
उसको बना दी मेरी रियासत का शुक्रिया ।।

होगी किसी को मुझसे- नहीं था गुमान में ।
लाये हो तुम जो इतनी मुहब्बत का शुक्रिया।।

मिलता नही है -चैन -जो मेरे बिना- क़भी।
इतनी हसीन तेरी इस -आदत का शुक्रिया ।।

उल्फ़त में तेरी मुझसे अग़र कुछ ख़ता हुई ।
मुझसे करी जो मेरी शिकायत का शुक्रिया ।।

आँसूं थे मेरी आँखों में -पर मुस्कुरा दिया ।
क़ायम रखी तो तूने -शरारत का शुक्रिया ।।

सींचा जो तूने नाज़ों से *मेंहदी*के बाग़ को ।
या रब तेरी अता का,इनायत का शुक्रिया।।

इक़बाल मेहदी काज़मी
किच्छा उधम सिंह नगर
उत्तराखंड 263148
7017848163



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