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मेरे अल्फाज़

सूखी टहनी पर- महक़ता गुलाब आ जाता । तुम जो आते तो खिज़ा पे शबाब आ जाता

Iqbal mehdi

121 कविताएं

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सूखी टहनी पर- महक़ता गुलाब आ जाता ।
तुम जो आते तो खिज़ा पे शबाब आ जाता ।

ख़ुद मुहब्बत की निगाहों पर हया छा जाती ।
मौसम-ऐ-इश्क़ पे बादल का नक़ाब आ जाता ।

साथ -होता -अग़र -जो- मेरे मुकद्दर -मेरा ।
फ़िर तो शायद मेरे हक़ में ही जवाब आ जाता ।

वो तो अच्छा हुआ ठुकरा दिया तूने मुझकों।
वरना दुनिया मे नया इंकलाब आ जाता ।

हम भी भर लेते वो नूर अपनी आँखों में।
काश "मेंहदी" तेरा वो माहताब आ जाता ।

इक़बाल मेंहदी काज़मी
किच्छा उधमसिंह नगर
उत्तराखंड 263148
7017848163 


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