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मेरे अल्फाज़

यूँ दिल को न हवा में उछाल के चलो ये दिन है जवानी के तुम संभाल के चलो

Iqbal mehdi

121 कविताएं

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यूँ दिल को न हवा में उछाल के चलो ।
ये दिन है जवानी के तुम संभाल के चलो ।।

रहना है तुमको बचकर ये बस्ती है झूठ की ।
ख़ुद को सच्चाइयों में तुम ढाल के चलो ।।

सबसे तो मिल चुके हो कभी खुद से भी मिलो।
जिसके हर एक लम्हें है कमाल के चलो ।।

जितनी बची है उसको तुम मस्ती में बिताओ।
अब बीत चुके दिन तेरे मलाल के चलो ।।

बस एक नज़र मुझकों मुहब्बत से देख लो ।
तुम सारी नफरतों को अब निकाल के चलो ।।

अब आप इनसे मेंहदी क्या मिलके कीजिए ।
किस्से है इनके ज़हनों में बवाल के चलो ।।

इक़बाल मेंहदी काज़मी
किच्छा उधमसिंह नगर
उत्तराखंड 263148
7017848163   


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