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मेरे अल्फाज़

ख़ाली रस्में निभाने से क्या फ़ायदा

Iqbal mehdi

121 कविताएं

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ख़ाली रस्में निभाने से क्या फ़ायदा ।
यूँ ही नजदीक आने से क्या फ़ायदा ।।

हाल-ऐ-दिल तो सुने पर तवज्जों न दें।
उनको बातें बताने से क्या फ़ायदा ।।

साथ में हो मग़र, दूरियां दिल में हो ।
ऐसी महफ़िल सजाने से क्या फ़ायदा ।

संग उसको क़भी जज्ब करता नहीं ।
उसको पानी पिलाने से क्या फ़ायदा ।।

जिनका उल्फ़त से न हो दूर तक वास्ता।
उनको गज़ले सुनाने से क्या फ़ायदा।।

"मेंहदी"दिल पर ही जब बोझ बढ़ने लगे।
ऐसे रिश्ते निभाने -से क्या फ़ायदा ।।

इक़बाल मेंहदी काज़मी
किच्छा उधम सिंह नगर
उत्तराखंड 263148
7017848163   


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