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मेरे अल्फाज़

तू कौन है कि,जो इतना लुभा रहा है मुझे

Iqbal mehdi

121 कविताएं

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तू कौन है कि, जो इतना लुभा रहा है मुझे 
लम्हा लम्हा जो आकर सता रहा है मुझे

जिस रोज़ से देखा है हुस्न-ए-जाना को 
तेरा ख्याल अब,हर-शब जगा रहा है मुझे

कहां से लाऊं तुझें,ये फ़िक्र खाए जाती है
तेरे बिना तो अब कुछ भी न भा रहा है मुझे

पलक को बंद करूँ तो तू छम से आती है 
नज़र बस तू ही तू हर-सिम्त आ रहा है मुझे

किया है चेहरे का दीदार जब से "मेंहदी"ने 
समां ईक़ प्यार का हर-पल दिखा रहा है मुझें

इक़बाल मेंहदी काज़मी
महिंद्रा एंड महिंद्रा
लालपुर
ऊधम सिंह नगर (उत्तराखंड)
मो-7017848163

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