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मेरे अल्फाज़

ये 'इश्क़' भी क्या खूब इनायत है ख़ुदा की

Iqbal mehdi

119 कविताएं

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ये 'इश्क़' भी क्या खूब इनायत है ख़ुदा की 
न 'मर्ज़' पता चलता, न ज़रूरत है दवा की ।।
ख़ून-ए-ज़िगर ने पूछा है अश्क़ों से ये सवाल 
हम दर्द है उल्फ़त का, या लज़्ज़त है वफ़ा की ।।

- इक़बाल मेंहदी काज़मी

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