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मेरे अल्फाज़

साथ हक के ख़ुदा,खुद होता है

Iqbal mehdi

121 कविताएं

38 Views
डर से बातिल के तू क्यूं रोता है ।
साथ हक के ख़ुदा,खुद होता है।।

इक़बाल मेंहदी काजमी
533, गोविन्द बाग़ निकट पानी टंकी
बलरामपुर

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