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मेरे अल्फाज़

क्या होगा मेरा ग़र वो कभी होगी रू-ब-रू

Iqbal mehdi

121 कविताएं

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क्या होगा मेरा ग़र वो कभी होगी रु-ब-रु।
इस वास्ते जारी है -लफ्ज़ों की ज़ुस्तजू ।।

कैसे करेंगे हम अपने जज़्बात-नुमायां ।
आता नहीं है हमको वो अंदाज-ए-गुफ़्तगू।।

-इक़बाल मेहदी काज़मी
उत्तराखंड 263148
7017848163

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