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मेरे अल्फाज़

निगाहों का सफ़र चेहरे पे,मेरी जान ठहरेगा

Iqbal mehdi

121 कविताएं

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निगाहों का सफ़र चेहरे पे,मेरी जान ठहरेगा ।
कोई ठहरे या न ठहरे मग़र अरमान ठहरेगा ।।

बला का हुस्न तुझमें है तेरी हर शै निराली है ।
मुक़ाबिल में कहां तेरे कोई इंसान ठहरेगा ।।

बसी है मेरे दिल मे तू,मेरे दिल में ही तू रहना।
वरना तेरे ठिकाने पर कोई अनजान ठहरेगा ।।

मेरी हस्ती ही कितनी है तेरे दीदार के आगें ।
फरिश्तों भी तुझें देखें तो न ईमान ठहरेगा ।।

दुपट्टे को वो लहराते हुए अब घर से निकले हैं।
अभी देखों कहाँ जा कर के ये तूफ़ान ठहरेगा ।।


इक़बाल मेहदी काज़मी
किच्छा उधम सिंह नगर
उत्तराखंड 263148
7017848163


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