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मेरे अल्फाज़

अल्फ़ाज़

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गिरगिट भी अपना रंग सोचकर बदलते हैं,
हम लालच के मारे कितना रंग बदलते हैं?

गूँगा मुँह खोलकर गाली दे या मवाली दे,
परिन्दे भी डरकर अब तो अल्फ़ाज़ बदलते हैं।।

यह जरूरी हैं जुबाँ हैं मुँह में प्यार से बोले हम,
नेता थोड़ी हैं दोस्तों जो ईमान बदलते हैं।।

आज फिर मैं अपना नाम भूल आया,
इंसान हैं फिर भी जात बदलते हैं।।

खूबसूरती लफ्ज़ो की दिल में उतरती हैं,
अजीब दौर हैं खुदा जो बात बदलते हैं।।

आज़ादी मिली हैं न सौदा करो,
दुश्मनों को देकर हिफाज़त हालात बदलते हैं ।।

जिसके इरादे न हो नेक पाक नहीं हो सकता,
खुदा की दुहाई देकर जज़्बात बदलते हैं।।

दो दिन की ज़िन्दगी हैं इज्जत से रहो प्रेमी,
आज़ाद कब अपने अल्फाज़ बदलते हैं?

-दीपकप्रेमी'विरह'
नाम-दीपकप्रेमी'विरह'
पता-ग्राम-खरगोन तहसील-बरेली जिला-रायसेन राज्य-म.प्र. पिन-464671
मो.न.-7509424196
[email protected]

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