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मेरे अल्फाज़

इंसां ना हुआ हिन्दू और मुसलमान हो गया...

पी के ख्याल

11 कविताएं

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इंसां ना हुआ हिन्दू और मुसलमान हो गया 
तरक्की कँहा, तबाही का सामान हो गया 
सियासत ने जब भी अपना खेल रचाया 
एक फलता फूलता शहर वीरान हो गया 
तमाशबीनों ने हाथ मे उठा लिए पत्थर
महकता हुआ गुलशन शमसान हो गया
मैने अपने दिल की बात सरेआम कह दी
मेरा मरना अब कितना आसान हो गया 

- पी के ख्याल

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