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मेरे अल्फाज़

मिला नया लम्हा मुझे याद जिसमें तू नहीं आया

Indrajeet Singh

62 कविताएं

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मिला न लम्हा मुझे याद जिसमें तू मुझे नहीं आया
वजह तो थी बहुत भुला तो फिर भी मैं तुझे नहीं पाया
में नही सुनता किसी की ये तो ख़बर वाज़िब है मगर
सही ख़बर है ये भी आज़माने को तू नहीं आया
सांसे भी लेता हूँ खामोशी से ये तो तुझे मालूम था लेकिन
ज़िंदा हूँ मैं ये भी तू दुनियां को बताने नही आया
में हूँ तन्हा क्यों तुझे पता था मेरी बे - लिहाज़ी मगर
पेश महफ़िल में तेरी मुझसे तू इतनी बे अदबी से आया
मुझमे इज़हरी नही है तुझे इल्म था मेरी बेज़ुबानी का मगर
मेरी खामोशी की ज़ुबाँ फिर भी क्यों तू समझ नहीं पाया
मेरी कमज़ोरी को ज़िद तूने बनाया बेहतर था मगर
मुझे संभालने तेरा हाथ मेरे हाथ में क्यों नहीं आया



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