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मेरे अल्फाज़

जीत तो दर्द गए

Indrajeet Singh

60 कविताएं

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दर्द मैं क्यों लिखू लिखा था कभी जो तुमको खुशी मैंने
अब भी रखता हूँ वही मुस्कुराहट जो दी थी मुझे कभी तूने
अलग ये वक़्त नही दिन न अलग अब भी रातें तुझसे
आज भी कर रही वो तेरी रहमतें कितनी ही बातें मुझसे
नही है तुझसे न ज़माने की रश्मों से रही अब न शिकायत मुझको
मेरी खामोशी ही कमी थी जो लग गई थी कभी हुनर तुझको
हौसले तूने दिए दर्द से तो हुआ करता था कब से याराना मेरा
जीत तो दर्द गए मगर बढ़ गया है अब सहने का पैमाना मेरा



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