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मेरे अल्फाज़

शायरी- इक गुमनाम सी

INDER BHOLE NATH

26 कविताएं

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हर शख्स यहां अधूूूरा, हर रिश्ता बिखरा हुआ सा है,
आजकल मिजा़ज मेरे शहर का कुछ उखड़ा हुआ सा है…

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