आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   AMMI JAAN
AMMI JAAN

मेरे अल्फाज़

अम्मी जान

Imrana Siddiqui

3 कविताएं

7 Views
मेरे जिस्म में ज़रा सी जान रहने दो
अपने होठों पे एक मुस्कान रहने दो

तेरे यादों में मिलता है सुकून बेहद--
अपनी यादों में मुझे परेशान रहने दो

इसमें बसी हैं मेरे बुज़ुर्गों की यादें---
मुझे मार दो मेरा कब्रिस्तान रहने दो

दोस्त सियासत के मुद्दे हैं और भी बहुत
छोडो यार ये हिन्दू-मुसलमान रहने दो

इधर भी अपने हैं और उधर भी अपने
बस भी करो ये क़त्ल-ए-आम रहने दो

मुझे डर है कहीं निशाना चूक न जाए
न चलाओ ये तीर-ओ-कमान रहने दो

इससे पलता है पेट मेरे बच्चों का--
न तोड़ो ये चाय की दूकान रहने दो

अपना मुल्क है अमन का गुलिस्तान-
अरे न बनाओ इसे पकिस्तान रहने दो

और कब तलक दुआएं दोगी मुझको--
बस भी करो मेरी अम्मी जान रहने दो

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!