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Nirbhaya bhaybheet kyon hai

मेरे अल्फाज़

निर्भया भयभीत क्यों है

Hrishabh Bharadwaj

2 कविताएं

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अभी तलक़ तो हर्षित था मन
अभी बढ़ी- बेचैनी क्यों है..
सुबह जो निकली तो हँस रही थी,
शाम हुयी तो- सहमी क्यों है..

अभी तो दुनिया को देखना था
अभी तो तारों को चूमना था..
जिजीविषा फिर कुचल दी गयी
सुता होने का ये दण्ड क्यों है..

संवेदनाएं क्यों मर गयी हैं
मौन हुआ ये समाज क्यों है..
सत्ताधारियों से पूछता हूँ
वो निर्भया भयभीत क्यों है..

अब दरिंदगी बहुत हो चुकी
अब आशिफ़ा बहुत रो चुकी
अङ्ग-भंग का कानून लाएं
आओ दामिनी को न्याय दिलवाएं..

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