आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Mera Dil Phirr Bachcha Hona Chahta Hai.

मेरे अल्फाज़

मेरा दिल फिर बच्चा होना चाहता है

Himanshu Jaiswal

8 कविताएं

91 Views
मेरा दिल फिर बच्चा होना चाहता है
दौड़ना, गिरना और फिर संभलना चाहता है

जो बीत गया है वो दिन ना आयेगा कभी
वक्त चला तो ना रूका कभी
कुछ दोस्त बिछड़ गये हमसे या फिर कहीं खो गये हैं
फिर वही शैतानी उन्मादी करना
तो कभी लड़ना और झगड़ना चाहता है
ये दिल फिर उनसे मिलना चाहता है

मेरा दिल फिर बच्चा होना चाहता है

नन्ही मुन्नी आंखों में ख़्वाब बड़े थे
सारे गम ओ मुश्किल से परे थे
यारों के संग निकल जाते थे दूर कहीं
राहें अनजान थी पर कदमो तले थे
हाथ फैलाये जैसे हम आसमानो में उड़े थे
ये दिल फिर से दूर कहीं अनजान राहों पर चलना चाहता है
हाथ फैलाये आसमानो में उड़ना चाहता है

मेरा दिल फिर बच्चा होना चाहता है।

हिमांशु जायसवाल!
कल्याणपुर, कानपुर!
उ○प्र○! 

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!