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मेरे अल्फाज़

बातें

Himanshu Arora

3 कविताएं

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बातें कुछ बोलती बातें,
कुछ बताती, कुछ दिखलाती हुईं

बातें कभी दिल के राज़ बतलाती हुईं
कभी दिल के दर्द छुपाती बातें
बातें कभी अपनों को अपनों से जोड़ती हुईं
कभी अपनों को ही जुदा करती बातें

ये बातें न होती तो क्या होता
क्या तुम कहती, क्या में सुनता
कैसे दिल का हाल बतलाता में
कैसे अपना प्यार जतलाता में
कैसे इज़हारे मोहब्बत होता
कैसे तुम कहती कैसे में सुनता

ये बातें हमारे दिल का आइना होतीं हैं
हमारे एहसासो को लफ्ज़ो का जामा पहनती हुईं
कभी नन्हे बोलो से सजी हुईं तोतली बातें
कभी लफ़्ज़ों में डुबोये थीके नश्तर

कई रूप कई भाषाएं इसकी
फिर भी एक भाषा में सबको जोड़ती बातें

हिमांशु सूरज

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