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मेरे अल्फाज़

अहा! यह दिन आया

Hema Ram

2 कविताएं

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अहा! यह दिन आया।
साहूकारों, ईमानदारों,कर्मठ, निष्ठावानों,
सच्चे,सीधे,सरल,साफ छवि वालों या
विरोधियों को मत देने का
अहा! यह दिन आया।।

रेलमपेल है,मेरे गॉव में, पिछले कुछ दिनों से;
कचेरी, हथाई, चोपाल का, जैसे युग लोट आया,
चलो गॉव मे फिर से सुनापन लाने का,
अहा! यह दिन आया।

दाल भात हलवा पुरी,चाय शराब सिगरेट से,
या बीड़ी या पान से गुजरे कुछ दिन भले बुरे
चलो फिर इस जीभ के अहसान चुकाने का
अहा! यह दिन आया।

बड़ा हो गया मैं भी काफी मेरी पूछ है।
मेरे कही चहेते है हर जन के शुभचिंतक है
मगर अपनी औकात पे आने का आज,
अहा! यह दिन आया।।

मैं युवा हूँ,और मैं बुजुर्गों को भी मानता हूँ; मगर
अपने हक फर्ज सब अच्छी तरह से जानता हूँ।
सो गाव के विकाश का,एक नयी शुरुआत का,
अहा! यह दिन आया ।।

हेमाराम गूजर
अध्यापक


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