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PRICK

मेरे अल्फाज़

चुभन

Harvinder Pal

78 कविताएं

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अब दुआ भी सुनी ना गई आजकल,
कि खुदा भी खयालों में खोया हुआ,

आहें भर भर के मरते चले जा रहे,
ना सुने भी तो क्या वो है सोया हुआ,

बस ज़रा सी चुभन से क्यूँ घबरा गऐ,
हमने काँटों से दिल को पिरोया हुआ,

जब से तुमने कहा,हैःजुदाई का वक्त,
हमने आँखों को तबसे भिगोया हुआ,

मेरा दामन नमक से हुआ तरबतर,
आज ही हमने पहना था धोया हुआ,

कम नहीं दर्दे दिल यूँ ही बढ़ता रहा,
रो रहा हूँ मैं भर रात रोया हुआ,

नाखुदा सुन के आके करेगा भी क्या,
हमने कश्ती को कब का डुबोया हुआ।

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