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NOTHING

मेरे अल्फाज़

कुछ नहीं

Harvinder Pal

78 कविताएं

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जिन्दगी न गुजर जाऐ बस कुछ यूँ ही,
थामने को भी बाकी बचे कुछ नहीं,

है मुकर्रर सभी की विदाई का वक्त,
इन्तज़ाम सफर को किए कुछ नहीं,

ऐसी मन्जिल के ज़ानिब है अपना सफर
कि तसव्वुर पे भी बस चले कुछ नहीं,

करते जाना ही होगा करम इस तरह,
माज़ी अपना मिले तो कहे कुछ नहीं,

वर्के जिन्दगी को एहतियातन लिखो,
स्याही में लफ्ज़ जुमला छुपे कुछ नहीं

पर्दा ऐ रूह मल मल के धोते रहो,
मैल का इक निशाँ भी दिखे कुछ नहीं,

पाश़ करमों के इस बार ही फूँक दो,
कि सज़ा ऐ करम ही बचे कुछ नहीं।

मुकर्ररःःतय । तसव्वुरःःकल्पना । माज़ीःःअतीत ।
वर्के जिन्दगीःः जीवन के पन्नों को । एहतियातनःःसावधानी से। लफ्ज ज़ुमलाःःअक्षर,वाक्य
पाशःःबन्धन।

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