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मेरे अल्फाज़

पशेमाँनी

Harvinder Pal

36 कविताएं

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जैसे शबनम किसी पत्ते पे ठहर जाती है,
मेरी आँखें नम हैं कोई आँसू है अभी,
गुँजाईश है सितम कुछ और कर डालो,
ठहरा आँसू भी छलकता है अभी,

सीखनी है तो वफा साकी से सीख लीजे,
रात भर जाम भरता रहा, पास बैठा है अभी,

शमाँ जलती है और परवाने पर दीवानगी,
रुक के तसल्ली कर लो,ये जलता है अभी,

गर्मिये इश्क की आतिश ने झुलसाया मुझे,
मेरा बुत मोम है पिघलता है अभी,

अब न आना कि वक्त पशेमाँनी का आया समझो,
साँस आई कि न आई,दम निकलता है अभी।

शबनम--ओस, पशेमाँनी--पश्चातापःःलज्जा

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