आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Ek paati tere nam ki

मेरे अल्फाज़

एक पाती तेरे नाम की

Harshita Vidyarthi

1 कविता

37 Views
कुछ लफ्ज़ जो कागज़ पे उकेरे हैं
ज़ुबान के मोहताज ये मुझे तेरी यादों से घेरे हैं
कुछ मुझे कलम से प्यार, कुछ तुम्हे मेरी आवाज नागवार
गर दिल को छू जाये तो समझना ये मेरे हैं।।

है अजीबो-गरीब सा रिश्ता ये हमारा
ना ख्वाहिशें, न बंदिशों का मारा
ना नीम सी कड़वाहट, ना शहद की मिठास
है अथाह प्रेम, जैसे सागर सा खारा

चीखती है खामोशियाँ तेरी, रखती हैं चाह मेरी
मांगे ये ज़िन्दगी भर का साथ
मेरे दिल तक लगाती हैं फेरी
डरती हैं ये मुझे खोने से
मत बांध बेड़ियों में यूं आरजूओं को तेरी

हो साथ तेरा, तो ज़हान सिर्फ मेरा
तुझ संग हैं खुशियां, दुखों पे लगे पेहरा
तू जो कहे वो सब कर जाऊं
धूप हो या छांव, तेरी ढाल बन जाऊं

ज़्यादा है प्यार तेरा, तो नहीं है मेरा भी अधूरा
तेरी सांसें हूँ मैं, मुझे तुझने किया है पूरा
परजीवी से हम, फिर कैसे हों जुदा ?
तेरी पूजा करूँ मैं, तू है मेरा खुदा।।

- हर्षिता

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!