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मेरे अल्फाज़

बहन की राखी आई

Harsh Pratap Singh

7 कविताएं

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सावन के रिमझिम महीने में
भिगोने ख़ुशियों के बारिश में,

लेकर दुआओं की बरसात आई
देखो मेरे बहन की राखी आई,

जो क्या हुआ वो मेरे पास नहीं
मेरी जान जो मेरे साथ नहीं,

वो मेरी सांसो से बंधी डोर सी है
मेरी बहन तो हमेशा मेरे साथ ही है

प्यारी हमारी मां की परछाई है बहन
बड़े नसीब वालों को मिलती है बहन,

ऐ ख़ुदा मेरी जान को सलामत रखना
हर दुख हर बला से बचाके रखना,

- हर्ष प्रताप सिंह


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