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मेरे अल्फाज़

आज़ादी की कहानी...

Harsh Gargwansi

6 कविताएं

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अग्रेजी सेना के सामने जो पहला वीर खड़ा था
अब मारू या मरू जो इस बात पर अड़ा था
आजाद हिंद के लिए वो पहला क्रांति का दंगल था
उस वीर योद्धा का नाम "बागी", पंडित मंगल था

पेशवा नाना साहब,अजिमुल्ला में जान आई थी
झाँसी वाली रानी भी तभी बागी बनकर आई थी
घर घर से एक नारा आया, हल्ला बोल-हल्ला बोल
बच्चे - बच्चे बुढे बोल उठे, हल्ला बोल-हल्ला बोल

धड़क धड़क धड़क उठी यह धरा और पवन
गरज गरज गरज उठा यह आसमा और चमन
चित्तु पाण्डेय ने जब अपनी पहली फौज बनाई
चढ़कर अग्रेजो के सिने पर हिंदुस्तानी फौज लहराई

इस क्रांति का नतिजा यह सामने बनकर आया
सबसे पहले बागी बलिया आजाद बनकर आया
देखों चन्द्रशेखर आजाद-भगत-गाधी का सैलाब आया
सन् 47 में लालकिले पर लहराता तिरंगा पैगाम आया

- हर्ष पाण्डेय

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