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मेरे अल्फाज़

कवि तुलना छोड़ो

Harish Mamgain

70 कविताएं

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क्यों आसमाँ को छूना चाहते हो 
आसमाँ की बेरहमी बादलों से पूछो 
बिजलियाँ बरसाके पानी कर देता है 
आस पास की चीज़ों को छुओ 
आप ज़मीन को छू सकते हो  
चाहो तो उसके अंदर भी खोजो
क्यों चाँद को पाना चाहते हो 
बस दूर से ही सुंदर दिखता है 
क्यों चाँद को चूमना चाहते हो  
पहले चाँद के बराबर तो बनो 
अपना नाप और आकार देखो 
चाँद तो  है धरती का दीवाना  
वो तो उसके ही पीछे घूमेगा
प्रिय को गुलाब क्यों कहते हो  
कुछ पलों का शबाब है गुलाब 
धूप पड़ेगी तो कुम्हला जाएगा 
एक झटके मे ही बिखर जाएगा 
गुलाब को प्रिय बेशक कह दो 
प्रिय को बस प्रिय ही रहने दो 
कवि तुम तुलना करना छोड़ो 
कभी तो जैसा जो है वैसा देखो

हरीश ममगाईं

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