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मेरे अल्फाज़

नमी...

Harish Mamgain

307 कविताएं

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पत्थरों की नगरी है, तू फूलों की पंखुड़ियाँ न ढूँढ
रिश्ते बनाता है तो बना ले , आँखों में नमी न पूछ

- हरीश ममगाईं 

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