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मेरे अल्फाज़

जब उसे पहली बार देखा था

Harish Jangid

3 कविताएं

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जब उसे पहली बार देखा था,
तब मैं स्तब्ध ही रह गया था
उसके होठों की मुस्कान देखकर,
मेरा दिल थम सा ही गया था
उसके गीले बालों से गिरती बूंदे नीर की ,
जैसे हलकी हलकी बारिश हो !
बचा कर रखा था कभी अपने आप को
इन बारिश की बूंदो से कही फिसल ना जाऊ
जब उसे पहली बार देखा था,
तब मैं स्तब्ध ही रह गया था,
मेरा दिल थम सा ही गया था
ना शायर थे कभी, ना ही रहे आशिक़ किसी के कभी,
पर उसकी पहली झलक से बेसुध सा हो गया था,
जब उसे पहली बार देखा था,
तब मैं स्तब्ध ही रह गया था


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