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मेरे अल्फाज़

आज पहली बार ये हुआ

Harish Chamoli

14 कविताएं

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अभी कुछ ही दिन बीते संग में
बातों का सिलसिला भी चलता  रहा
पर इक बात तुम्हें बतला दूँ मैं  
आज का दिन कुछ खास लगा
जाने क्या बात थी इस दिन में
मन मचला दामिनी आहत लगा
आज पहली बार ये हुआ
उसने अपना हाथ मेरे हाथ दिया

धरती मिली हो अम्बर से जैसे
चाँद मिल गया चांदनी से
सागर को मिल गयी हो मंजिल
मयूर ने सतरंगी पंख बिखेरे  
जब दो साँसों का हुवा मिलन  
आज पहली बार ये  हुआ 
उसने अपना हाथ मेरे हाथ दिया

आज ये  खाऊं मैं कसम 
उसका  हाथ न कभी छोडूं
किया उसने जो भरोसा मुझपर 
उस भरोसे  को न कभी  तोडूं 
चाहे आये विपदाएं  कई लाख 
इस प्रीत  के बंधन  को मैं निस्वार्थ निभाऊँ
आज पहली बार ये  हुआ
उसने अपना हाथ मेरे हाथ दिया

- हरीश चमोली
टिहरी गढ़वाल  (उत्तराखंड)

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