आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Main tujhe chahu Kewal bas m

मेरे अल्फाज़

मैं तुझे चाहूं केवल बस मैं।

Hariom Shankar

22 कविताएं

44 Views
मैं तुझे चाहूं केवल बस मैं
तुम मुझे चाहो तेरे बस में
इतना ही काफी नहीं है जहां में
परिणय में बंधना किस्मत के बस में
मैं तुझे चाहूं केवल बस मैं।

झूठे वादें झूठी दिलासा
यह तो कतई नहीं मेरे बस में
तुम ही कहो कैसे प्रीत निभाऊं
मैं तुम्हें चाहूं केवल बस मैं।

केवल मानव नहीं हैं हम-तुम
जात-पात और ऊंच-नीच में
एक ही धरा पर बटें समूह में
मैं तुझे चाहू केवल बस मैं।

भाव-करुणा की बातें ना कर
इस पर भारी उनकी प्रथा है
झूठी यश और संकुचित जहां में
मैं तुम्हें चाहूं केवल बस मैं।

इस वसुधा की अपनी ही लेखा
राधा-किशन भी रहे अधूरा
शायद इसलिए उनकी पूजा
मैं तुझे चाहूं केवल बस मैं।

पाश नहीं कोई बांध ले मुझको
पर समाज का बोध है हमको
अपनी भी कुछ जिम्मेदारी
मैं तुझे चाहूं केवल बस मैं।

हम जैसों की तो लंबी सूची है
निश्चल निस्वार्थ मन है अपना
औरों के खुशी को गम को लगा लूं
मैं तुझे चाहूं केवल बस मैं।

हरिओम शंकर
दरभंगा, बिहार।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!