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मेरे अल्फाज़

छूट की लूट

Hari Kishan

20 कविताएं

42 Views
हरी किशन चावला ‘धनपत’
बचपन में सुनते थे
‘राम नाम की लूट है
लूट सके तो लूट
पीछे पछताए क्या होत है
जब प्राण जायेंगे छूट‘.

आजकल सावन के महीने से
शुरू होती है ‘छूट’ की ‘लूट’
छूट नहीं भारी छूट,
इतनी भारी कि सर चढ़ कर बोले
जो भी सुने खींचा चला आये
जो न आ पाए वो –
प्राण जाने तक पश्चताये.

छूट के विज्ञापन कहें-
‘लुट’ सके तो ‘लुट’
हम समझते हैं –
‘लूट’ सके तो ‘लूट’
छूट का मतलब होता है –
छूट में जाएँ तो आपकी जेब में
एक भी पैसा छूट न जाए.

सावन आते ही मन में
छूट की लूट की आस
कुलबुलाने लगती है
पहले सावन में –
पिया मिलन की आस रहती थी
आज कल छूट की लूट का -
बेसब्री से इंतजार रहता है.

छूट की लूट का विज्ञापन देखते ही
मन छूट को लूटने के लिए –
लालयित हो उठता है
जो छूट का विज्ञापन देखता है-
उसे लगता है छूट उसे बुला रही है
आजा, मुझे लूट के ले जा.

ठग तो लूटा करते है –
फुसला कर, फंसा कर
छूट के पास तो बंदा -
खुद लुटने चला जाता है
जैंसे बाई जी के कोठे पर
राजा, रईस जाया करते थे

छूट के लिए लूले-लंगडे भी
दौड़ लगाने लगता है
बंदा छूट को लूटने के लिए
टूट पड़ने वालों की क़तार में
सबसे आगे खड़ा मिलता है.

दोस्तों छूट की लूट से बचो
इसके अंकगणित को समझो-
बांसमती चावल अस्सी रुपये किलो
गोलकुंडा ब्रांड बांसमती चावल
एक सौ अस्सी रुपये किलो
‘एक के साथ एक मुफ्त’ के बाद भी
मिलता है नब्बे रूपये किलो.

ब्रांडेड प्रोडक्ट्स का नहीं होता
कभी कोई बाज़ार भाव
मूल्य भी इनका होता है
छूट भी इनकी होती है
बिना लूट के छूट कैंसि ?
ग्राहक की जेब में एक रुपया भी -
छूट गया, तो लूट कैंसी ?.



छूट की लूट
- हरी किशन चावला ‘धनपत’
बचपन में सुनते थे
‘राम नाम की लूट है
लूट सके तो लूट
पीछे पछताए क्या होत है
जब प्राण जायेंगे छूट‘.

आजकल सावन के महीने से
शुरू होती है ‘छूट’ की ‘लूट’
छूट नहीं भारी छूट,
इतनी भारी कि सर चढ़ कर बोले
जो भी सुने खींचा चला आये
जो न आ पाए वो –
प्राण जाने तक पश्चताये.

छूट के विज्ञापन कहें-
‘लुट’ सके तो ‘लुट’
हम समझते हैं –
‘लूट’ सके तो ‘लूट’
छूट का मतलब होता है –
छूट में जाएँ तो आपकी जेब में
एक भी पैसा छूट न जाए.

सावन आते ही मन में
छूट की लूट की आस
कुलबुलाने लगती है
पहले सावन में –
पिया मिलन की आस रहती थी
आज कल छूट की लूट का -
बेसब्री से इंतजार रहता है.

छूट की लूट का विज्ञापन देखते ही
मन छूट को लूटने के लिए –
लालयित हो उठता है
जो छूट का विज्ञापन देखता है-
उसे लगता है छूट उसे बुला रही है
आजा, मुझे लूट के ले जा.

ठग तो लूटा करते है –
फुसला कर, फंसा कर
छूट के पास तो बंदा -
खुद लुटने चला जाता है
जैंसे बाई जी के कोठे पर
राजा, रईस जाया करते थे

छूट के लिए लूले-लंगडे भी
दौड़ लगाने लगता है
बंदा छूट को लूटने के लिए
टूट पड़ने वालों की क़तार में
सबसे आगे खड़ा मिलता है.

दोस्तों छूट की लूट से बचो
इसके अंकगणित को समझो-
बांसमती चावल अस्सी रुपये किलो
गोलकुंडा ब्रांड बांसमती चावल
एक सौ अस्सी रुपये किलो
‘एक के साथ एक मुफ्त’ के बाद भी
मिलता है नब्बे रूपये किलो.

ब्रांडेड प्रोडक्ट्स का नहीं होता
कभी कोई बाज़ार भाव
मूल्य भी इनका होता है
छूट भी इनकी होती है
बिना लूट के छूट कैंसि ?
ग्राहक की जेब में एक रुपया भी -
छूट गया, तो लूट कैंसी ?.




छूट की लूट
- हरी किशन चावला ‘धनपत’
बचपन में सुनते थे
‘राम नाम की लूट है
लूट सके तो लूट
पीछे पछताए क्या होत है
जब प्राण जायेंगे छूट‘.

आजकल सावन के महीने से
शुरू होती है ‘छूट’ की ‘लूट’
छूट नहीं भारी छूट,
इतनी भारी कि सर चढ़ कर बोले
जो भी सुने खींचा चला आये
जो न आ पाए वो –
प्राण जाने तक पश्चताये.

छूट के विज्ञापन कहें-
‘लुट’ सके तो ‘लुट’
हम समझते हैं –
‘लूट’ सके तो ‘लूट’
छूट का मतलब होता है –
छूट में जाएँ तो आपकी जेब में
एक भी पैसा छूट न जाए.

सावन आते ही मन में
छूट की लूट की आस
कुलबुलाने लगती है
पहले सावन में –
पिया मिलन की आस रहती थी
आज कल छूट की लूट का -
बेसब्री से इंतजार रहता है.

छूट की लूट का विज्ञापन देखते ही
मन छूट को लूटने के लिए –
लालयित हो उठता है
जो छूट का विज्ञापन देखता है-
उसे लगता है छूट उसे बुला रही है
आजा, मुझे लूट के ले जा.

ठग तो लूटा करते है –
फुसला कर, फंसा कर
छूट के पास तो बंदा -
खुद लुटने चला जाता है
जैंसे बाई जी के कोठे पर
राजा, रईस जाया करते थे

छूट के लिए लूले-लंगडे भी
दौड़ लगाने लगता है
बंदा छूट को लूटने के लिए
टूट पड़ने वालों की क़तार में
सबसे आगे खड़ा मिलता है.

दोस्तों छूट की लूट से बचो
इसके अंकगणित को समझो-
बांसमती चावल अस्सी रुपये किलो
गोलकुंडा ब्रांड बांसमती चावल
एक सौ अस्सी रुपये किलो
‘एक के साथ एक मुफ्त’ के बाद भी
मिलता है नब्बे रूपये किलो.

ब्रांडेड प्रोडक्ट्स का नहीं होता
कभी कोई बाज़ार भाव
मूल्य भी इनका होता है
छूट भी इनकी होती है
बिना लूट के छूट कैंसि ?
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छूट गया, तो लूट कैंसी ?

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