आपका शहर Close
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Napharato ki aandhi

मेरे अल्फाज़

नफरतों की आंधी

Gurjar vikram

2 कविताएं

13 Views
ये चारों ओर जो फैल रही है नफरतों की आंधी
हर इन्सां ने अपनी मर्यादाओं की सीमा है लांघी

चंहू और घृणा द्वैष का जहर हवाओं में घुला है
है भाई भाई और दोस्त दोस्त में जलन बडी ही गहरी

कहीं पर है पिता पुत्र में बैर बडा ही गहरा
तो कहीं है संबधोंंकी आड़ में कदम कदम पर पहरा

ये क्या हुआ जो आज हर संबधों मेंं है गहरी खाई
कितने ही मधुर वचन कहे पर ये खाई ना भरने पाई

जो एक बार टूटा था संबंधों का ये नाजुक धागा
फिर टूटता ही चला गया और गांठ पड़ गई गहरी

काेेेशिश तो हमने भी की थी बनकर के एक प्रहरी
पर नफरतों की छाप उनके दिलों में थी बहुत ही गहरी

हर संबधो में होता है प्रेम बहुत जरुरी
प्रेम से ही होती है शुरुआत बडी सुनहरी

गुर्जर विक्रमसिंह (गुर्जर प्रतिहार)
ग्राम - मुंडिया
करौली , राजस्थान
(9016815503)

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!