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मेरे अल्फाज़

नुकसान हो गया

Guddu Sikandrabadi

119 कविताएं

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मेरे दिल के तार तूने जब से तोड़े है
देख इस दिल का क्या नुकसान हो गया,
वो जो शीश महल था मेरे दिल का
देखते ही देखते चकना चूर हो गया।

मुझे नही पता तू बेवफा होगी
तुझ से प्यार किया तो नुकसान हो गया ,
हर बार की तरह तूने मुझे डाँटा है
देख मेरे चेहरे पर उदासी का निशान हो गया।

क्या खूब पहचानेगी तू इस दर्द को
खुशियो का सरे-आम नुकसान हो गया ,
मेरे बसकी न है प्यार-मुहब्बत
रुसवाई का क्या कोई इनाम हो गया।

कब और कहाँ लिखा तूने अफसाना
बे मतलब का मेरा नुकसान हो गया ,
मुहब्बत भी एक भूल ही है यारो
न जाने कोन कोन बर्बाद हो गया।

- गुड्डू सिकंद्राबादी

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