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मेरे अल्फाज़

बोल कि लब आज़ाद है मेरे

Guddu Sikandrabadi

114 कविताएं

49 Views
" बोल कि लब आज़ाद है मेरे "

पंछी पिंजरे से मांगता रहा
अवाम सियासत से मांग रही आज़ादी,

इंसाँ इंसाँ से मांगता रहा
बेटियां दरिंदो से मांग रही आज़ादी,

शहीद दुश्मन से मांगता रहा
माँ सरहदों से मांगती रही आज़ादी ,

दुनिया एक कैदखाना
वतन भी मांग रहा आज़ादी ,

और कलम लिखती रही
बोल कि लब आज़ाद है मेरे....

- गुड्डू सिकंद्राबादी
Cont. : 9718959056
#AzadAlfaz
@amarujalakavya
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