प्रेम

                
                                                             
                            नीर मीन का प्रेम है
                                                                     
                            
प्रेम है चातक चांद,
प्रेम है शबरी के बेरों में,
है प्रेम विदुर का साग,
प्रेम है चंचल मन का बंधन,
जो बिन बांधे बंध जाए,
प्रेम के बस मुरली कान्हां की
राधे राधे गायें,

- जी एस मिश्र
 गोंडा, उत्तर प्रदेश

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3 years ago

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