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मेरे अल्फाज़

इज़हार -ए -इश्क़ हक़ीक़त में इतना आसां नहीं होता

Gopinath Krishna

41 कविताएं

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इज़हार -ए -इश्क हक़ीक़त में इतना आसां नहीं होता।
ख़ुमार -ए -इश्क़ को सहना, इतना आसां नहीं होता।।१

ज़िस्म को चाहने वाले तो आशिक हो नहीं सकते ,
मुहब्बत रूह से होती है वहाँ जुबां नहीं होता। २

एकतरफा प्यार में आशिक इजहार -ए -इश्क नहीं करते ,
आहें भर के मर जाते, बयां आसां नहीं होता। ३

जुनून -ए -इश्क में आशिक हिमाकत कर ही लेते हैं ,
इज़हार -ए -इश्क करके भी, इश्क आसां नहीं होता। ४

बिना शिक़वा शिकायत के जो कुर्बान हो जाते ,
फतिंगे की तरह लौ पे , मगर आसां नहीं होता। ५

दो दिल जब कभी मिलते चर्चे हर जगह होती ,
' कृष्ण ' बने इश्क में पागल ;इतना आसां नहीं होता ,६

स्वरचित /मौलिक
गोपी नाथ कृष्ण
सहरसा , बिहार


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