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मेरे अल्फाज़

विरह के बोल

Gopal Sharma

127 कविताएं

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कभी बात नही करते
कभी मुलाकात नही करते
न अपने दिल की कहते
न हमारे दिल की सुनते

पत्ते पर ओस की तरह
मिटने से पहले आह नही भरते
कभी हमारी यादे सुनकर
भी वाह वाह नही करते

इतने निष्ठुर होने का
कारण क्या है
पुराने जैसे हो जायो
निवारण क्या है .

मुझे पुरानी एक घटना
याद है
कहा था तुमने मिलकर
किया मेरा समय बर्बाद है

इन्तजार अब और
न करायो
मानसून आ गया है
तुम भी आ जायो

गोपाल शर्मा

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