समर्पित तुम्हें---

                
                                                             
                            मंदिर की घंटी
                                                                     
                            
धूप का आगाज
यकायक सुनी
किसी की आवाज़

किस का रखा था
मेरे सिर पर हाथ
कौन कह रहा था
क्या खायेगा आज

मेरा नखरे दिखाना
आज कुछ नहीं खाना
किसी का मुझे बताना
क्या स्कूल नहीं जाना

प्यार से दूध पिलाना
स्कूल का बस्ता लाना
किताबों में छांट कर
आज की किताब लगाना

हाथ में मेरा हाथ पकड़
कंधे पर बस्ता लटकाना
मुझे स्कूल तक छोड़ आना
हां मां तुम ही थी वो-----
समर्पित तुम्हें आज का तराना

- gopal sharma

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2 weeks ago
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