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मेरे अल्फाज़

दरिया उवाच

Gopal Sharma

36 कविताएं

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मुझे तट पर खड़े देख
दरिया मुझसे बोला
आप मेरे मेहमान है
आपका सम्मान है
आप मस्ती से नहाये
शरीर पर साबुन न लगाये
मुझे अधिक न अजमाये
गहरे जल मे कभी न जाये
गंदगी मुझमे न फैलाये
मुझे प्रदूषण से बचाये
मैं विदेश मे तुम्हारा मान बढाता हू
वहा के पक्षी अपने पास बुलाता हू
तुम्हारे खेतो की प्यास बुझाता हू
फसल लहलहाती देख खुश हो जाता हू
अब सोचो तुम्हारा क्या है अरमान
मै बहता रहूं या छोड दू अपने प्राण

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