मेरे गुरु

                
                                                             
                            जन्मदात्री को हमने प्रथम गुरु पाया
                                                                     
                            
जीवन पथ की राह को,पिता ने दिखाया
राज धर्म का पालन करना धर्म गुरु ने सिखाया
साक्षरता की सरगम को विद्यालय ने पढ़ाया
आपने पारस बन प्रगति मार्ग पर बढ़ाया
गुरु वशिष्ठ न होते तो राजा राम ना होते
सांदपणि ऋषि न होते तो घनश्याम न होते
और अगर आप न होते,तो हमारी पहचान भी न होती
आपकी महिमा अगम,अनुकम्पा नर्मदा सम
नतमस्तक हूँ गुरु चरणों,गुरु शिष्य का पावन नाता
गुरु परम्परा के अनुगामी रहेंगे,यह हमारा वादा

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3 years ago

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