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मेरे अल्फाज़

इंसान

Gaurav Rawat

1 कविता

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अभी वक्त है थोड़ा मुझे पहचान लो दंगो से भड़का वा सैलाब हूं,थाम लो
जाति और रंगों में करते है भेद भाव,रगो में बहती नफरत की आग
मिला ना किसी को कुछ भी ऐसा जो अपने साथ ले जाएगा
रक्त का हर कतरा नालियों में बेह जाएगा
शायद अभी मौका है सब कुछ संभल जाएगा
वक्त आने पर मुझ जैसा लेखक कलम छोड़ हतियार उठाएगा
इसलिए कहता हूं अभी वक्त है थोड़ा मुझे पहचान लो दंगो से भड़का वा सैलाब हूं,थाम लो

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