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मेरे अल्फाज़

वक़्त की मार देखिए

GAURAV LALWANI

11 कविताएं

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वक़्त की मार देखिए,वक़्त की धार देखिए,
बेबस पडा घरो मे इंसान देखिए,
प्रकृति का इंतकाम देखिए, अपनो को बचाता घरो मे इंसान देखिए,
विध्वंसकता का मुकाम देखिए, धरती पे राज करने वाले घरो मे इंसान देखिए,

मनुष्य का इलजाम देखिए, विवश कर प्रकृति को घरो मे इंसान देखिए,
जमाने का धनवान देखिए, बिना दाम अपनी साँसो को बचाता घरो मे इंसान देखिए,
बेजुबानो पर अत्याचार देखिए, पिंजरो सा कैद घरो मे इंसान देखिए,
वक़्त की मार देखिए, बेबस पडा घरो मे इंसान देखिए,

गौरव ललवानी

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